बाइबल में बताया गया है कि यीशु मसीह ने सच्चे भविष्यवक्ताओं को झूठे भविष्यवक्ताओं से अलग करने के लिए निम्नलिखित तार्किक मानदंड प्रस्तुत किए:
झूठे नबियों से सावधान रहो, जो भेड़ों के भेष में तुम्हारे पास आते हैं, परन्तु भीतर से वे भूखे भेड़िये होते हैं। तुम उन्हें उनके फलों से पहचानोगे। क्या मनुष्य कंटीली झाड़ियों से अंगूर या कंटीली झाड़ियों से अंजीर तोड़ते हैं? ठीक वैसे ही, हर अच्छा पेड़ अच्छा फल देता है, परन्तु बुरा पेड़ बुरा फल देता है। अच्छा पेड़ बुरा फल नहीं दे सकता, और न ही बुरा पेड़ अच्छा फल दे सकता है। जो पेड़ अच्छा फल नहीं देता, उसे काट कर आग में फेंक दिया जाता है। इसलिए, तुम उन्हें उनके फलों से पहचानोगे।[1]
पैगंबर ईसा (अ.स.) का यह इरादा रहा होगा कि किसी व्यक्ति के चरित्र के बारे में उसके कर्म, उसके शब्दों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होते हैं, और इसलिए एक सच्चे पैगंबर का व्यक्तिगत आचरण अच्छा होना चाहिए। उनका यह भी इरादा रहा होगा कि उनकी शिक्षाओं का दूसरों पर सकारात्मक प्रभाव अच्छा हो, या उनका संदेश स्वयं पवित्रता और अच्छाई का स्पष्ट आह्वान हो। मुहम्मद ﷺ के उपदेशों का विश्लेषण करने की सुंदरता यह है कि इन तीनों व्याख्याओं को उन पर लागू किया जा सकता है। यह लेख यह दर्शाएगा कि कैसे केवल उनका चरित्र ही उनके पैगंबर होने का सशक्त प्रमाण प्रस्तुत करता है।